अधिनियम एवं नियम
पृष्ठभूमि
18वीं शताब्दी में ब्रिटिश अधिकारियों ने भारत की विशाल पुरातात्विक संपदा को बाहर भेजना शुरू किया। इस विध्वंस पर कोई नियंत्रण नहीं था। भारत की सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति को समझते हुए, कुछ प्रबुद्ध प्रशासकों ने भारत की भौतिक सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए अधिनियम की आवश्यकता महसूस की।
दुर्घटनावश पाई गई पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक मूल्य की निधियों के संरक्षण एवं उनके विधिसम्मत निपटान के लिए अधिनियमित।
निर्मित विरासत का संरक्षण
लॉर्ड कर्जन द्वारा अधिनियमित। इसने विशेष रूप से निजी स्वामित्व वाले स्मारकों के परिरक्षण पर प्रभावी अधिकार प्रदान किया।
28 अगस्त 1958 को अधिनियमित। यह राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातत्वीय स्थलों के परिरक्षण का प्रावधान करता है।
चल पुरावशेषों का संरक्षण
9 सितम्बर 1972 को पुरावशेषों और कला संपदा पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिनियमित। यह पुरावशेषों के निर्यात व्यापार को नियंत्रित करता है।